Breaking news सिंधिया के आरोप पर बचाव में आए मेडिकल कॉलेज के निदेशक

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भिलाई. भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट कर आरोप लगाया गया था छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दुर्ग में स्थित अपने दामाद के चन्दूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॅालेज को सरकारी कोष से खरीद रहे है। इस मामले में मेडिकल कॉलेज, चंदूलाल चंद्राकर के निदेशक देवकुमार चंद्राकर अब बचाव में सामने आए हैं। उन्होंने कहा है कि सीएम के दामाद क्षितिज चंद्राकर का किसी प्रकार का हिस्सेदारी नहीं है ना ही प्रत्यक्ष या परोक्ष रुप से उनका कोई संबंध है।

संस्था के सम्मान को पहुंचाया ठेस
उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज पर मेडिकल कॉसील ऑफ इंडिया के द्वारा धोखाधडी़ का आरोप लगाए हैं। यह पूरी तरह से तथ्य हीन है। एमसीआई से इस प्रकार का कोई आरोप पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। इससे कॉलेज व इस संस्था से जुड़े लोगों की भावनाओं को गहरा आघात लगा है। संस्था के सम्मान को ठेस पहुंची है।

नियमित प्रक्रिया
निदेशक का कहना है कि अप्रैल 2018 में चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण एक नियमित प्रक्रिया के तहत मेडिकल कॉसील ऑफ इंडिया के निरीक्षकों ने किया। निरीक्षकों ने इस दौरान कुछ कमियां पाई थी और उसे कॉलेज को मान्यता न देकर पून: निरीक्षण करवाने का विकल्प दिए। यह एक नियमीत प्रक्रिया है। इसमे मेडिकल कॉसील ऑफ इंडिया के निरीक्षकों के रिपोर्ट के आधार पर निर्णय देती है। यह प्रक्रिया शासकीय व अशासकीय दोनों कॉलेजो में होते रहती है। इस प्रक्रिया के तहत कई बार प्रदेश के शासकीय व निजी कॉलेजों को भी जीरो ईयर घोषित किए। सीटों को भी घटाया गया था। शासकीय कॉलेजों में अंडरटेकिंग के आधार पर मान्यता देने की करने की प्रक्रिया रही है।

कर्ज की भी दी जानकारी
उन्होंने बताया कि चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल हॉस्पिटल, नेहरु नगर भिलाई जो कि 2000 से संचालित की जा रही है जिसमें समय-समय पर विभिन्न वित्तीय संस्थानों, बैंक के माध्यम से ऋण प्राप्त कि गई थी। जिसे नियत समय पर चुकता कर दिए। छत्तीसगढ़ में मेडिकल कॉलेज व डॉक्टरों की कमी को देखते हुए इस संस्था ने एक मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए 2008 में निर्णय लिए। संस्था ने ग्राम कचांदुर में जमीन खरीदी कर 2012 में इंडियन बंैक व सेन्ट्ल बैंक ऑफ इंडिया से 130 करोड़ रुपए का टर्म लोन व 8 करोड़ रुपए बैक ओवरड्राफ्ट के रुप में लिया। अब तक दोनों बैंको को मिलाकर करीब 140 करोड़ रुपए मूलधन व ब्याज मिला कर बैंक को भुगतान किया जा चुका है। वर्तमान में करीब 80 करोड़ रुपए ऋण बकाया है।

आर्थिक संकट की वजह से नहीं मिली मान्यता
निदेशक का कहना है कि 2013 में मेडिकल कॉसील ऑफ इंडिया के नियमों का पालन करते हुए विधीवत कॉलेज का निरीक्षण करवा कर मेडिकल कॉसील ऑफ इंडिया से प्रथम वर्ष के छात्रों के प्रवेश के लिए मान्यता प्राप्त हुई। इस प्रकार लगातार 2013, 2014, 2015, 2016, 2017 तक कॉलेज का निरीक्षण करवाकर मेडिकल कॉसील ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त करते आ रहे थे। 2018 में हुए निरीक्षण में कुछ कमियों के कारण उस साल के लिए एडमिशन के लिए मेडिकल कॉसील ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त नहीं हो सकी। इसके पीछे संस्था की आर्थिक संकट ही मुख्य कारण था, संस्था के आय और व्यय में काफी अंतर था। प्रति माह करीब 2.5 करोड रुपए वेतन व अन्य खर्चों व करीब 2.5 करोड़ रुपए ऋण की किस्त अदायगी में चले जाता था।

बेचने का लिया फैसला
प्रबंधन ने हालात को देखते हुए मेडिकल कॉलेज को बेचने का निर्णय लिया। उसी दौरान छत्तीसगढ़ शासन ने दुर्ग जिले में शासकीय मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की जो कि दुर्ग कीजनता की पुरानी मांग थी। प्रबंधन ने विचार किया कि छात्रो व प्रदेश की जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए मेडिकल कॉलेज को निजी हाथों में देने के बजाए राज्य सरकार को दिया जाए। इसके बाद ही मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण के लिए संस्था ने छत्तीसगढ़ शासन से निवेदन किया। तब 2 फरवरी 2021 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसकी घोषणा की।



source https://www.patrika.com/bhilai-news/director-of-medical-college-came-to-the-rescue-on-scindia-s-charge-6977885/

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